अरे रुक जा रे बन्दे , अरे थम जा रे बन्दे ...



अरे रुक जा रे बन्दे , अरे थम जा रे बन्दे ...
की कुदरत हंस पड़ेगी हो ...
अरे नींदें है जख्मी , अरे सपने है भूके 
की करवट फट पड़ेगी हो .

अरे मंदिर ये चुप है , अरे मस्जिद ये गुमसुम 
इबादत थक पड़ेगी हो .
समय की लाल आंधी , कब्रिस्तान के रास्ते 
अरे लतपथ चलेगी हो .

किसे काफ़िर कहेगा किसे कायर कहेगा 
तेरी कब तक चलेगी हो .
किसे काफ़िर कहेगा किसे कायर कहेगा 
तेरी कब तक चलेगी हो .

अरे मंदिर ये चुप है अरे मस्जिद है गुमसुम 
इबादत थक पड़ेगी हो .
समय की लाल आंधी कब्रिस्तान के रास्ते 
अरे लतपथ चलेगी हो .

अरे नींदें है जख्मी अरे सपने है भूके 
की करवट फट पड़ेगी हो .
यह अंधी चोट तेरी कभी की सुख जाती 
मगर अब पक चलेगी .
अरे रुक जा रे बन्दे , अरे थम जा रे बन्दे ........................

Comments

  1. मुम्बई की आतंकवादी घटना में मारे गये आम जन के प्रति सम्बेदना .............

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